Win Rummy: गलत डिक्लेरेशन के बाद हनुमान जी से गलती स्वीकारने का बल
गलत सूट का गुलाम एक समूह की भूल दिखाता है। हनुमान जी से अपने शब्द सुधारने का साहस माँगें और Ishta Mel पर उसी भाव से अर्पण करें।
“हो गया। तेरहों पत्ते लग गए।”
अभ्यास की मेज़ पर ऐसी स्थिति सोचिए जहाँ यह घोषणा अभी बड़े विश्वास से हुई है। सामने वाला आखिरी समूह की ओर इशारा करता है: “गुलाम का सूट देखो।”
समझाने से पहले ही असहजता आ जाती है। आप सबके सामने कह चुके हैं कि हाथ तैयार है। अब अपने कहे का बचाव करें या उस पत्ते को ध्यान से देखें?
भक्त उसी क्षण हनुमान जी को पुकार सकता है। उनसे ऐसा बल माँग सकता है जिससे अपनी भूल सामने आने पर उसका सामना कर सके, और इतनी विनम्रता कि सही बात सुन पाए।
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अभ्यास की मेज़ पर पत्ते इस तरह लगे हैं:
- 3♥, 4♥, 5♥
- 7♣, 8♣, 9♣, 10♣
- Q♥, Q♣, Q♦
- 9♠, 10♠, J♦
कुल तेरह पत्ते हैं। इस उदाहरण में कोई जोकर नहीं है; हर पत्ता अपने अंक और सूट में इस्तेमाल हुआ है। पहले दो समूह सीक्वेंस हैं और रानियों का सेट भी सही है। आखिरी तीन पत्तों के अंक नौ, दस, गुलाम के क्रम में हैं, लेकिन गुलाम ईंट का है और बाकी दो हुकुम के हैं। यहाँ अपनाए रमी नियमों के अनुसार वे एक ही सूट का वैध सीक्वेंस नहीं बनाते।
आपत्ति की जगह बिल्कुल साफ है। सामने वाला आपकी पसंद पर बहस नहीं कर रहा। जहाँ हुकुम का गुलाम चाहिए, वहाँ J♦ रखा है।
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“यह मुझसे छूट गया” कहने की शक्ति
हनुमान जी बल, बुद्धि और श्रीराम के प्रति भक्ति के लिए पूजे जाते हैं। श्री सत्य साईं संस्था का हनुमान परिचय उनकी विनम्रता पर भी ध्यान देता है। उनके प्रति श्रद्धा में बड़ा बल और सुनने की नम्रता साथ रह सकते हैं।
इस मेज़ पर उसी आशीर्वाद की जरूरत है। गलत सूट अब दिख चुका है। फिर भी बहस करते रहना उस घोषणा को बचाना होगा जो सामने के पत्तों से मेल नहीं खाती। भक्त हनुमान जी से इतना स्थिर बल माँग सकता है कि भूल दिखाई देने दे।
“मैंने गुलाम का सूट नहीं देखा। यह समूह पूरा नहीं है।”
भूल पहचान लेने से अधिक कठिन कभी-कभी यह बात कहना लगता है। अभी दूसरों को जो बताया था, उसे बदलना पड़ता है। लेकिन अब सबके सामने हाथ की स्थिति साफ होती है: दो सीक्वेंस और रानियों का सेट तैयार हैं; आखिरी तीन पत्ते बताए गए ढंग से साथ नहीं लगते।
हनुमान जी से विनती भी साफ हो जाती है: “अपने कहे को सुधारने का साहस दीजिए।”
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इस स्वीकार को हनुमान जी के सामने रखें
Ishta Mel के हनुमान अर्पण क्षेत्र में सिंदूर, लड्डू, तुलसी, घी और दीपक का समूह है। उसी क्षण को याद रखते हुए दर्शन करें: घोषणा जल्दी हो गई, गलती दिखाई गई और अब सही बात कहने के लिए बल चाहिए।
प्रदर्शित पूरा समूह एक साथ अर्पित करें। वेबसाइट पर मंत्र है: ॐ हनुमते नमः।
उसके बाद अपनी विनती रख सकते हैं:
हनुमान जी, इस गलती का सामना करने का बल दीजिए। मेरा अहंकार सही बात के रास्ते में न आए। सुनने की विनम्रता और अपने कहे को सुधारने का साहस दीजिए। जय हनुमान।
अर्पण के साथ वह भूल रखी गई है जिसे अब समझ चुके हैं। संकोच अभी है, फिर भी सबके सामने स्वीकार करने में उनका सहारा माँगा जा रहा है।
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इस प्रसंग का अंत सही बात कहने पर होता है
अभ्यास की मेज़ पर लौटकर J♦ को 9♠ और 10♠ से अलग रखें। हाथ का अधूरा हिस्सा फिर दिखाई देने लगता है। खिलाड़ी उस पर इशारा करके बता सकता है कि कहाँ चूक हुई थी।
“मैंने अंक देखे और सूट पर ध्यान नहीं दिया। यह हाथ अभी पूरा नहीं हुआ है।”
यह प्रसंग यहीं पूरा हो सकता है। इस बात का मूल्य होने के लिए अगली बाज़ी जीतना जरूरी नहीं। गलती हुई, उसका साफ कारण सामने आया और घोषणा करने वाले ने अपने शब्द सुधार लिए।
हनुमान जी को मानने वाला Win Rummy पाठक इसी में माँगे गए बल को महसूस कर सकता है: सच स्वीकारने का साहस और दूसरे की सही बात सुनने की विनम्रता। जय बजरंगबली।
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