IW7: गलत आरोप के बाद बात सँभालने का साहस हनुमान जी से माँगें

शतरंज का नियम सुधार देने से चोट पहुँचाने वाला आरोप अपने-आप नहीं सुधरता। अपने कहे शब्द और आवश्यक क्षमा-याचना हनुमान जी के सामने रखें।

“तुमने अपने फायदे के लिए नियम बदल दिया।” आरोप दोस्तों के सामने लगा। फिर नियम देखा गया और आरोप लगाने वाला गलत निकला।

IW7 के पाठक के लिए अभ्यास का यह प्रसंग वहाँ शुरू होता है जहाँ नियम की व्याख्या समाप्त होती है। तथ्य की गलती सुधर गई, लेकिन किसी की ईमानदारी पर कहे शब्दों से चोट अब भी रह सकती है।

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तथ्य ठीक-ठीक वापस रखें

उदाहरण में शतरंज खिलाड़ी ने प्यादे का प्रमोशन घोड़े में किया। दोस्त समझता था कि प्रमोशन केवल रानी में होता है, इसलिए नियम बदलने का आरोप लगा दिया।

FIDE के शतरंज नियम का अनुच्छेद 3.7.3.3 उसी रंग की रानी, हाथी, ऊँट या घोड़े में प्रमोशन की अनुमति देता है। घोड़ा चुनना नियम बदलना नहीं था।

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सुधार और क्षमा-याचना अलग काम करते हैं

“घोड़ा चुनना अनुमत है” नियम सुधारता है। इससे “तुमने अपने फायदे के लिए बदला” वापस नहीं हो जाता। दूसरे वाक्य ने दोस्त की ईमानदारी पर प्रश्न उठाया था।

पूरा उत्तर हो सकता है: “प्रमोशन के बारे में तुम सही थे। नियम ठीक से जाने बिना मैंने तुम पर उसे बदलने का आरोप लगाया। यह अनुचित था, मुझे माफ करना।” जिन्होंने आरोप सुना, उन्हें सुधार भी सुनना चाहिए।

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असहज हिस्से से जल्दी आगे न निकलें

तुरंत नया राउंड शुरू करना माफी माँगने से आसान लग सकता है। यहाँ हनुमान जी का बल और विनय सहायता माँगने का सार्थक आधार हैं। सत्य साईं संस्था का हनुमान जयंती विवरण इन गुणों का साथ सम्मान करता है।

हनुमान जी के अर्पण क्षेत्र में दर्शन करते समय उस दोस्त के सामने लौटने का संकल्प रखें जिस पर आरोप लगाया। प्रदर्शित सिंदूर, लड्डू, तुलसी, घी और दीपक साथ अर्पित करें; निवेदन का विषय सच्ची क्षमा-याचना का साहस हो।

हनुमान जी, अपने कहे शब्दों की जिम्मेदारी लेने की शक्ति दीजिए। साफ माफी माँग सकूँ, जिन्होंने सुना उनके सामने बात सुधार सकूँ और दोस्त से तुरंत मुझे सहज कर देने की अपेक्षा किए बिना उसकी बात सुन सकूँ।

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दोस्त तुरंत माफ कर सकता है या समय ले सकता है। बोलने वाले को अपनी माफी सच्ची लगी, केवल इसलिए संबंध पूरी तरह सुधर गया नहीं कहा जा सकता। अगला संकल्प स्पष्ट हो: फिर आरोप लगाने से पहले नियम जाँचूँगा और अनिश्चित बात को अनिश्चित ही बताऊँगा।

अर्पण में विनय की प्रार्थना है। बातचीत में मित्र के प्रति जिम्मेदारी निभानी है।

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