IE777: दोस्त कहे “अब तुम्हें कोई नहीं हरा सकता”, तो क्या जवाब दें?
अच्छे खेल की प्रशंसा स्वीकार करें, पर हमेशा जीतने का वादा न करें। हनुमान जी से विनम्रता के साथ बल माँगें और Ishta Mel पर कृतज्ञ अर्पण करें।
“बस, अब तुम्हें कोई नहीं हरा सकता!”
दोस्त प्यार से कह रहा है। आपने अभी ताश के कठिन वर्गीकरण का अभ्यास बिना मदद पूरा किया, हर समूह का कारण भी बताया। प्रशंसा सुनकर अच्छा लगना स्वाभाविक है। लेकिन “कोई नहीं हरा सकता” उस बात से बहुत बड़ी है कि “यह काम अच्छा किया”।
IE777 के पाठक के लिए हनुमान जी का बल और विनम्रता इस पल को भक्ति की दिशा दे सकते हैं: अपनापन स्वीकार करें, बिना अगले खेल को असंभव वादे की परीक्षा बनाए।
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कह सकते हैं, “आखिर यह हाथ समझ आया। मेरे समझने तक साथ बैठे, उसके लिए धन्यवाद।”
इसमें अपनी उपलब्धि और मित्र का साथ, दोनों स्वीकार होते हैं। उसकी खुशी के हर शब्द को सुधारना जरूरी नहीं। और जवाब में “हाँ, अब कभी नहीं हारूँगा” कहना भी जरूरी नहीं।
अभी इतना साबित हुआ कि यह अभ्यास अपने दम पर पूरा किया। अलग हाथ में अलग कारण समझाना पड़ सकता है। आगे की क्षमता को बढ़ने की जगह चाहिए; एक खुशी के वाक्य में उसे पूरा घोषित करना जरूरी नहीं।
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यह बात हनुमान जी के सामने क्यों रखें?
Sathya Sai संगठन के हनुमान जयंती वर्णन में रामभक्ति के साथ साहस, बुद्धि, बल और विनम्रता आते हैं। इन गुणों को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा करना जरूरी नहीं।
अपनी मेहनत से खुश होकर भी याद रख सकते हैं कि क्या सीखना बाकी है। प्रशंसा स्वीकार करते समय दूसरों को छोटा मानना जरूरी नहीं। हनुमान जी से यह संतुलन बनाए रखने की कृपा माँगना भी पूरी प्रार्थना है, उस शाम भी जब कुछ गलत नहीं हुआ।
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Ishta Mel के हनुमान अर्पण क्षेत्र में प्रदर्शित सिंदूर, लड्डू, तुलसी, घी और दीपक साथ अर्पित करें। अर्पण में उस सहायता और बल के प्रति धन्यवाद रखें जिसके लिए कृतज्ञ हैं।
ॐ हनुमते नमः
हनुमान जी, मेरा अर्पण और धन्यवाद स्वीकार कीजिए। इस अभ्यास में टिके रहने की शक्ति पर अपनी कृपा रखें। उसके साथ विनम्रता भी रहे, ताकि प्रशंसा मुझे असावधान न बनाए और किसी दूसरे से सीखने का मन बंद न करे।
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दोस्त फिर कहे, “अब तो चैंपियन!”, तो मुस्कराकर कह सकते हैं, “यह अच्छा हुआ, देखें आगे क्या सीखता हूँ।” बात सहज आगे बढ़ जाती है।
IE777 के पाठक के लिए यह जवाब उस पल की खुशी बनाए रखता है। साथ ही कल के खेल को वास्तविक अनुभव रहने देता है, हमेशा एक तारीफ पर खरा उतरने की बाध्यता नहीं बनाता।
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